Categories
Act

Good

लोक लेखापाल चूक अधिनियम , 1850 ( 1850 का अधिनियम संख्यांक 12 ) 22 मार्च , 1850 ]

लोक लेखापालों की चूक से होने वाली हानि के बचाव के लिए अधिनियम उद्देशिका – लोक लेखापालों की चूक के कारण होने वाली हानि से अधिक अच्छे बचाव के लिए निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है –

1 . लोक लेखापालों का प्रतिभूति देना -प्रत्येक लोक लेखापाल अपने पद के दायित्वों के निर्वहन के लिए तथा अपने पद के कारण अपने कब्जे या नियंत्रण में आने वाली सब धनराशियों का 8 लेखा देने के लिए प्रतिभूति देगा ।

 2 . प्रतिभूति की राशि और किस्म तथा उसके साथ किस प्रकार के प्रतिभू हों -किसी लोक लेखापाल के पद के प्रति विशेष रूप से निर्देश करने वाले अधिनियम के अभाव में , दी गई प्रतिभूति ऐसी रकम की और ऐसी किस्म की , चाहे स्थावर सम्पत्ति की या जंगम संपत्ति की , या दोनों की , होगी और ( पद की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए ) उनके साथ में ऐसे प्रतिभू होंगे जो उस प्राधिकारी द्वारा य – समय पर बनाए गए या बनाए जाने वाले नियमों द्वारा अपेक्षित होंगे जिसके द्वारा ऐसे लोक लेखापाल की उसके पद पर नियक्ति की जाती हो 2 * * * |

3 . लोक लेखापाल की परिभाषा -इस अधिनियम की धारा । और 2 के प्रयोजनों के लिए लोक लेखापाल पद से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे शासकीय समनुदेशिती या न्यासी या सर्वराहकार के रूप में यह काम सौंपा गया है कि किसी अन्य व्यक्ति या किन्हीं अन्य व्यक्तियों की धनराशि को या धनराशि की प्रतिभूतियों को प्राप्त करे या अपनी अभिरक्षा में रखे या उस पर नियंत्रण रखे अथवा ( किसी अन्य व्यक्ति या किन्हीं अन्य व्यक्तियों की ) किसी भूमि का प्रबन्ध करें तथा इस अधिनियम की धारा 4 और 5 के प्रयोजनों के लिए इस पद के अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति भी होगा जिसे केन्द्रीय सरकार या 4 * * * राज्य सरकार की सेवा में किसी पद पर होने के कारण यह काम सौंपा गया है कि उस सरकार की धनराशि को या धनराशि की प्रतिभूतियों को प्राप्त करे या अपनी अभिरक्षा में रखे या उन पर नियंत्रण रखे अथवा ( उस सरकार की ) किसी भूमि का प्रबन्ध करे । ]

4 . लेखापालों या प्रतिभुओं का अभियोजन -लोक लेखापाल जिस कार्यालय में हो उसका प्रधान व्यक्ति या उसके प्रधान व्यक्ति ऐसे लोक लेखापाल या उसके प्रतिभुओं के विरुद्ध उसके कारण हुई कोई हानि या उसके हिसाब में कोई गबन होने पर इस प्रकार कार्यवाही कर सकेंगे मानो उस हानि या गबन की रकम सरकार को देय भू – राजस्व का बकाया हो ।

5 . लेखापालों द्वारा या उनके विरुद्ध कार्यवाहियों को अधिनियमितियों का लागू होना -सरकार को देय भू – राजस्व के बकाया की वसूली के लिए और ऐसे व्यक्ति द्वारा नुकसानी की वसूली के लिए जिसके विरुद्ध बकाया की वसूली की कार्यवाही दोषपूर्ण ढंग से की गई हो , इस समय प्रवृत्त या इसके पश्चात् प्रवृत्त होने वाले सब विनियम और अधिनियम ऐसे किसी लोक लेखापाल द्वारा और उसके विरुद्ध कार्यवाही की प्रक्रिया सम्बन्धी ऐसे परिवर्तनों के साथ लागू होंगे जो उन्हें उस मामले को लागू करने के लिए आवश्यक हों ।

 6 . [ पूर्ववर्ती नियमों का विधिमान्यकरण । — निरसन अधिनियम , 1870 ( 1870 का 14 ) द्वारा निरसित ।